सरकारी गोदाम भरे, फिर भी बाजार ठंडा: OMSS में गेहूं बिक्री सुस्त, थोक खरीदार पीछे
देश में गेहूं का बंपर भंडार होने के बावजूद खुले बाजार में सरकार की बिक्री कोशिशें रंग नहीं जमा पा रही हैं। ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं की ई-नीलामी को इस सीजन ठंडी प्रतिक्रिया मिल रही है, क्योंकि निजी बाजार में पहले से पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कीमतों में खास तेजी नहीं है।
खाद्य निगम (FCI) की ओर से दोबारा शुरू की गई ई-नीलामी में अब तक सीमित मात्रा में ही गेहूं बिक पाया है। आटा मिलों और अन्य थोक खरीदारों की कम दिलचस्पी ने सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जानकारों के मुताबिक, जब खुले बाजार में भाव स्थिर हों और आपूर्ति भरपूर हो, तो निजी खरीदार सरकारी स्टॉक की ओर रुख करने से बचते हैं।
रिकॉर्ड उत्पादन ने बिगाड़ा गणित
2024–25 फसल वर्ष में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने से बाजार में दबाव साफ नजर आ रहा है। अनुमान से ज्यादा पैदावार और आने वाले सीजन में बेहतर बुवाई की उम्मीदों ने कीमतों को थाम रखा है। यही वजह है कि OMSS के तहत तय दरों पर गेहूं खरीदने में कारोबारियों को फिलहाल खास फायदा नजर नहीं आ रहा।
कीमतों पर दबाव, सरकार के सामने चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार आक्रामक तरीके से और गेहूं बाजार में उतारती है, तो इससे कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। इसका असर अगले विपणन सीजन में किसानों की निजी बिक्री पर भी पड़ने की आशंका है। फिलहाल दिल्ली और अन्य प्रमुख मंडियों में गेहूं के भाव OMSS दरों से थोड़ा ही ऊपर चल रहे हैं, जिससे सरकारी बिक्री की रफ्तार सुस्त बनी हुई है।
चावल की बिक्री तेज, लेकिन भंडार ऊंचा
दिलचस्प बात यह है कि जहां गेहूं की बिक्री ठंडी है, वहीं चावल के मामले में सरकार रिकॉर्ड स्तर पर बाजार में आपूर्ति कर चुकी है। इसके बावजूद केंद्रीय पूल में चावल का स्टॉक लगातार ऊंचा बना हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि खपत और बिक्री के बीच संतुलन नहीं बना, तो भंडारण लागत और खाद्य सब्सिडी का बोझ और बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, भरे हुए गोदाम और ठंडा बाजार सरकार के लिए नई रणनीति की मांग कर रहे हैं—ताकि कीमतों को संतुलित रखते हुए स्टॉक भी घटाया जा सके और किसानों व उपभोक्ताओं दोनों के हित सुरक्षित रहें।
